ये कैसा रिश्ता??? Part-19

धीरे धीरे श्वेता का जख़्म भरने लगा, श्वेता ठीक हो रही थी राहुल उसे अक्सर देखने आ जाया करता था।

श्वेता अब अकेली हो चुकी थी उसके भाई और बहन चले गए थे। कमरे में रहने के वजह से उसे सारा काम करना पड़ता था खाना भी अकेले ही बनाना पड़ता था। उसकी पढ़ाई भी अब धीरे धीरे कठिन होती जा रही थी एग्जाम में कुछ ही महीने बचे थे इस वजह से श्वेता की फैमिली और राहुल ने भी उसे होस्टल भेजने का निर्णय लिया।

हालांकि राहुल के लिए वहां पहले जैसे आने जाने की आजादी नही होती परन्तु फिर भी वह श्वेता के पढ़ाई को लेकर ज्यादा चिंतित रहता था। वह खुद चाहता था कि श्वेता को ज्यादा काम ना करना पड़े वह अपने पढ़ाई पे ध्यान दे सके।

गर्मी खत्म होने वाली थी वर्ष की पहली बारिश धरती की प्यास बुझाने को उत्तवला हो रही थी, और इसी मौसम में आज से 20 वर्ष पहले राहुल का जन्म हुआ था। मतलब अब कुछ ही दिन बचे थे राहुल के जन्मदिन में। श्वेता इस दिन को हमेशा हमेशा के लिए यादगार बना देना चाहती थी ऐसा लगता है जैसे उसे तब ही पता था कि ये वक़्त ये खास दिन फिर उन दोनो के जीवन मे कभी नही आएगा।

राहुल अपने कोचिंग में ज्यादा व्यस्त रहता था फिर भी श्वेता उसकी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गई थी। हर शाम को राहुल श्वेता को फ़ोन कर उस से उसके दिन के बारे में पूछता, साथ ही अपने दिन के बारे में बताता यंहा तक कि सारा हिसाब भी वो श्वेता के साथ ही करता था।

श्वेता इधर राहुल के जन्मदिन के लिए कुछ खास करने के लिए हर रोज समय निकाल कर कुछ न कुछ तैयारी करते रहती थी, तो राहुल उधर श्वेता के हॉस्टल के तलास में परेशान था। वो उसे अच्छे जगह पर रखना चाहता था जहाँ उसे किसी चीज की कोई दिक्कत न हो और वो अच्छे से पढ़ाई कर सके। साथ ही वहाँ का माहौल भी सही हो।

राहुल जब श्वेता के लिए होस्टल खोज रहा था तो उसे अक्सर होस्टलों में वहां के मालिक हॉस्टल में अंदर जा कर देखने की गुजारिश करते थे। राहुल बाहर आ कर श्वेता को कहता कि यंहा तो तुम्हे किसी कीमत पे नही रखूंगा।

श्वेता बड़े मासूमियत से पूछती क्यों?

राहुल गुस्से में- ये गर्ल्स हॉस्टल है जब ये मुझे अंदर जा के देखने के लिए बोल सकता है तो कल को कोई भी आएगा उसे सब के पर्सनल कमरे दिखा सकता है। लड़कियां रहती है कोई भी बिना कहे पूछे उनके रूम में कैसे प्रवेश कर सकता है कुछ चीज़ें निजी भी होनी चाहिए।

श्वेता- ओके ओके गुस्सा नही करते, कहीं और मिल जाएगा।

जहाँ आपकी बाबू को कोई नही देखने आएगा। (हँसने लगती है)

ये बातें फ़ोन पर हो रही थी, राहुल अक्सर अकेले ही श्वेता के लिए होस्टल ढूंढता था।

अंततः उसे स्वेता के कोचिंग के करीब ही एक होस्टल मिल गया परन्तु वह उस जगह जा कर श्वेता के साथ बात भी नही कर सकता था।

राहुल: गैलरी का पासवर्ड क्या है बाबू?

श्वेता: नही बताउंगी।

राहुल: अरे, जल्दी बताओ।

श्वेता: प्लीज़ नही बता सकती।

राहुल: ऐसा क्या है इसमे जो तुम मुझसे छुपा रहे हो।

श्वेता: अभी नही बता सकती, आप समझने की कोशिस क्यों नही करते।

Contineu…

कहानी आगे पढ़ने के लिए यंहा क्लिक करे।

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